भारतीय संस्कृति में सावन का महीना बेहद पवित्र और उल्लास से भरा हुआ माना जाता है। यह महीना भगवान शिव की आराधना, प्रकृति की हरियाली, और सामाजिक-धार्मिक पर्वों के लिए विशेष महत्व रखता है। सावन के दौरान कई व्रत, उत्सव और मेलों का आयोजन होता है। इन्हीं में से एक प्रमुख पर्व है हरियाली तीज, जिसे उत्तर भारत, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार समेत देश के कई हिस्सों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
साल 2025 में हरियाली तीज का उत्सव सावन माह में विशेष महत्त्व के साथ मनाया जाएगा। आइए जानते हैं सावन माह का महत्व, हरियाली तीज की परंपरा, कथा, और इसे मनाने के तरीके के बारे में विस्तार से।
सावन माह का महत्व
1. भगवान शिव की आराधना का महीना
सावन को भगवान शिव का प्रिय महीना माना गया है। इस पूरे माह में शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, और धतूरा चढ़ाकर उनकी पूजा की जाती है। मान्यता है कि सावन में शिव की आराधना करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
2. प्रकृति का उल्लास
सावन वर्षा ऋतु का महीना होता है। चारों ओर हरियाली छा जाती है, खेत-खलिहान लहलहा उठते हैं, नदियाँ-तालाब पानी से भर जाते हैं। प्रकृति की सुंदरता देखकर मन प्रफुल्लित हो उठता है, इसलिए इसे हरियाली का महीना भी कहा जाता है।
3. धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व
सावन के सोमवार का व्रत, नाग पंचमी, श्रावणी पूर्णिमा, राखी, और हरियाली तीज जैसे पर्व इसी महीने में आते हैं। इनका धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्व है।
हरियाली तीज 2025 कब है?
हरियाली तीज सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है।
- 2025 में हरियाली तीज की तिथि: 28 जुलाई 2025 (सोमवार)
इस दिन विवाहित महिलाएँ सौभाग्य और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएँ योग्य वर प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।
हरियाली तीज का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
- पौराणिक मान्यता
कहा जाता है कि इस दिन माता पार्वती ने कठिन तपस्या कर भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया था। इसी कारण इसे श्रृंगार और सौभाग्य का पर्व कहा जाता है। - प्रकृति का उत्सव
सावन में चारों ओर हरियाली छाई रहती है। महिलाएँ झूले झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेती हैं। - सौभाग्य और अखंड सुहाग का व्रत
विवाहित महिलाएँ अपने पति के दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से इस दिन निर्जला व्रत करती हैं। - सामाजिक मेल-जोल का अवसर
इस अवसर पर महिलाएँ अपने मायके जाती हैं, सखियों के साथ मिलकर तीज का आनंद लेती हैं। इससे रिश्तों में अपनापन और प्रेम बढ़ता है।
हरियाली तीज की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कई जन्मों तक कठोर तपस्या की। 108वें जन्म में उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था। इसलिए इस व्रत को सौभाग्य प्राप्ति और पति की लंबी आयु के लिए शुभ माना जाता है।
हरियाली तीज 2025 के लिए विशेष पूजा विधि
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमा या चित्र को पूजा स्थान पर स्थापित करें।
- रोली, चंदन, अक्षत, फल, फूल और बेलपत्र से पूजन करें।
- तीज व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
- निर्जला व्रत का संकल्प लें और शाम को पूजा के बाद व्रत खोलें।
हरियाली तीज और आधुनिक समय
आज के समय में भी हरियाली तीज का उत्साह कम नहीं हुआ है। शहरों में भले ही पेड़ों पर झूले कम दिखते हों, लेकिन पार्क और सोसायटी में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। महिलाएँ इस दिन सामूहिक रूप से पूजा करती हैं, गीत-संगीत और डांस का आयोजन होता है, जिससे इस पारंपरिक पर्व की रौनक बरकरार रहती है।
हरियाली तीज से जुड़े प्रमुख व्यंजन
- घेवर – तीज का सबसे लोकप्रिय मिठाई
- मालपुआ – घी में तला मीठा पकवान
- खीर और पूड़ी – व्रत खोलने के बाद खाई जाती है
- मेवे और सूखे फलों की मिठाइयाँ
सावन माह और हरियाली तीज का संदेश
यह पर्व हमें प्रकृति से जुड़ने, रिश्तों को मजबूत करने और भगवान शिव-पार्वती के आदर्श दांपत्य जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश देता है। साथ ही यह त्योहार जीवन में प्रेम, विश्वास और उत्साह बनाए रखने की सीख देता है।
सावन माह और हरियाली तीज 2025: परंपरा और महत्त्व
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना और प्रकृति की हरियाली का प्रतीक माना जाता है। वर्षा ऋतु में धरती हरी-भरी हो जाती है, जिससे मन में उल्लास और उमंग भर जाती है। इसी माह में आने वाला हरियाली तीज पर्व सौभाग्य, प्रेम और भक्ति का संदेश देता है।
हरियाली तीज 2025 की तिथि – 28 जुलाई 2025 (सोमवार)। इस दिन विवाहित महिलाएँ पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएँ योग्य वर प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। इस अवसर पर महिलाएँ हरे वस्त्र पहनती हैं, मेहंदी रचाती हैं, झूला झूलती हैं और लोकगीत गाती हैं।
मायके से सिंधारा (श्रृंगार का सामान, मिठाइयाँ) आता है और तीज के विशेष व्यंजन जैसे घेवर, मालपुआ, खीर बनते हैं। शाम को शिव-पार्वती की पूजा कर व्रत कथा सुनी जाती है।
यह पर्व हमें प्रकृति से जुड़ने, रिश्तों को मजबूत करने और प्रेम व भक्ति का महत्व समझाने का संदेश देता है।
सावन माह और हरियाली तीज 2025
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना, हरियाली और उत्सव का प्रतीक है। वर्षा ऋतु में प्रकृति का सौंदर्य अपने चरम पर होता है। इसी पवित्र माह में आने वाली हरियाली तीज को विशेष महत्व दिया गया है।
हरियाली तीज 2025 की तिथि – 28 जुलाई 2025 (सोमवार)। यह पर्व विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन का प्रतीक है। कुंवारी कन्याएँ भी मनचाहा वर पाने की कामना से यह व्रत करती हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। इसलिए इस दिन शिव-पार्वती की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। महिलाएँ इस अवसर पर हरे वस्त्र पहनती हैं, मेहंदी रचाती हैं, झूला झूलती हैं और लोकगीत गाती हैं।
मायके से सिंधारा भेजा जाता है जिसमें श्रृंगार सामग्री और मिठाइयाँ होती हैं। व्रत के बाद पारंपरिक व्यंजन जैसे घेवर, मालपुआ और खीर का आनंद लिया जाता है।
यह पर्व प्रकृति, प्रेम और भक्ति का उत्सव है, जो रिश्तों में मिठास और जीवन में उत्साह भर देता है।
सावन माह और हरियाली तीज 2025: परंपरा, महत्व और उत्सव
भारत की सांस्कृतिक परंपराओं में सावन माह का विशेष स्थान है। वर्षा ऋतु का यह महीना प्रकृति की हरियाली, धार्मिक अनुष्ठानों और भक्ति भावना से भरपूर होता है। मान्यता है कि यह महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। सावन में शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाकर पूजा करने से सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। इसी माह में आने वाला हरियाली तीज पर्व महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
हरियाली तीज 2025 की तिथि
2025 में हरियाली तीज 28 जुलाई, सोमवार को मनाई जाएगी। यह पर्व सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है।
हरियाली तीज का धार्मिक महत्व
हरियाली तीज को सौभाग्य और प्रेम का पर्व कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए अनेक जन्मों तक कठोर तपस्या की थी। 108वें जन्म में उनकी तपस्या सफल हुई और भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। तभी से यह तीज व्रत विवाहित स्त्रियों के लिए अखंड सौभाग्य और कुंवारी कन्याओं के लिए योग्य वर प्राप्ति का प्रतीक बन गया।
उत्सव और परंपराएँ
- महिलाएँ इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं और शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
- हरियाली का प्रतीक हरा रंग इस दिन विशेष माना जाता है। महिलाएँ हरे वस्त्र, चूड़ियाँ और श्रृंगार करती हैं।
- हाथों में मेहंदी रचाना शुभ माना जाता है। मेहंदी का गहरा रंग सौभाग्य का प्रतीक है।
- गाँवों और शहरों में झूले डाले जाते हैं, महिलाएँ लोकगीत गाते हुए झूला झूलती हैं।
- विवाहित बेटियों के मायके से सिंधारा भेजा जाता है जिसमें साड़ी, श्रृंगार का सामान और मिठाइयाँ शामिल होती हैं।
- व्रत के बाद घेवर, मालपुआ, खीर जैसे विशेष व्यंजनों का आनंद लिया जाता है।
सावन माह और प्रकृति का संबंध
सावन का समय बारिश और हरियाली का होता है। खेत-खलिहान लहलहा उठते हैं, नदियाँ और तालाब पानी से भर जाते हैं। इस प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर मन प्रसन्न हो जाता है। हरियाली तीज इस प्रकृति उत्सव का भी प्रतीक है।
आधुनिक समय में तीज
आज भी तीज का उत्साह उतना ही है, बस मनाने का तरीका थोड़ा बदला है। शहरों में पार्कों और सोसायटी में सामूहिक तीज समारोह होते हैं। महिलाएँ ग्रुप में पूजा करती हैं, डांस-गीत का आयोजन होता है और सोशल मीडिया पर तीज के फोटो-वीडियो साझा किए जाते हैं।
तीज का संदेश
हरियाली तीज हमें बताती है कि प्रकृति से जुड़ाव, रिश्तों में प्रेम और भक्ति का महत्व जीवन को सुंदर बनाता है। यह पर्व परिवार को एकजुट करने और संस्कृति से जोड़ने का माध्यम भी है।
संक्षेप में, सावन माह भक्ति, प्रेम और प्रकृति का उत्सव है, और हरियाली तीज इसका सबसे सुंदर रूप। साल 2025 में यह पर्व 28 जुलाई को आएगा, तो इस बार सावन की हरियाली और तीज की खुशियों को जरूर मनाएँ।
निष्कर्ष
सावन माह और हरियाली तीज भारतीय संस्कृति में प्रेम, भक्ति, सौभाग्य और प्रकृति के उत्सव का प्रतीक हैं। चाहे गाँव हो या शहर, महिलाएँ इस दिन पूरे उत्साह से व्रत, पूजा, श्रृंगार और झूले का आनंद लेती हैं। साल 2025 में हरियाली तीज 28 जुलाई को मनाई जाएगी, तो इस बार भी सावन की हरियाली के साथ तीज का आनंद जरूर लें।






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